बेमेतराछत्तीसगढ़

कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं के मार्गदर्शन में ग्रीष्मकालीन धान से 100% मुक्ति, वैकल्पिक फसलों की ओर निर्णायक कदम

ग्राम अंधियारखोर ने रचा सतत कृषि का इतिहास

बेमेतरा, 31 दिसम्बर 2025 । लगातार घटती वर्षा, भू-जल स्तर में गिरावट तथा बढ़ती सिंचाई लागत जैसी चुनौतियों के बीच कृषि को टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने की दिशा में जिला प्रशासन बेमेतरा ने एक ऐतिहासिक पहल की है। कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं के दूरदर्शी मार्गदर्शन एवं सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप ग्राम अंधियारखोर ने रबी मौसम में ग्रीष्मकालीन धान की खेती को पूर्ण रूप से त्याग कर दलहन–तिलहन एवं कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों को अपनाते हुए कृषि परिवर्तन की नई मिसाल प्रस्तुत की है।

गत वर्ष जहां ग्राम अंधियारखोर में लगभग 662 एकड़ क्षेत्रफल में ग्रीष्मकालीन धान की खेती की जा रही थी, वहीं इस वर्ष किसानों ने सर्वसम्मति से 100 प्रतिशत ग्रीष्मकालीन धान का प्रतिस्थापन करते हुए चना, मसूर, मूंग, उड़द, सरसों एवं अन्य वैकल्पिक फसलों की बोनी की है। यह परिवर्तन न केवल जिले बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बनकर उभरा है।

प्रशासनिक पहल से बदली सोच, किसानों ने लिया सामूहिक निर्णय

कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं के नेतृत्व में जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा समय-समय पर आयोजित बैठकों, जागरूकता अभियानों एवं तकनीकी मार्गदर्शन ने किसानों की सोच को नई दिशा दी। ग्राम स्तर पर किसानों ने सामूहिक बैठक आयोजित कर यह निर्णय लिया कि सीमित जल संसाधनों के दौर में ग्रीष्मकालीन धान की खेती भविष्य के लिए जोखिमपूर्ण है और इससे जल संकट और गहराएगा। प्रशासन के विश्वास एवं वैज्ञानिक सलाह के आधार पर किसानों ने वैकल्पिक फसलों को अपनाया, जो वर्तमान में संतोषजनक एवं उत्साहजनक स्थिति में हैं।

जल संरक्षण, लागत में कमी और आय में वृद्धि के स्पष्ट लाभ

इस फसल परिवर्तन से गांव में सिंचाई जल की भारी बचत हो रही है। साथ ही, धान की तुलना में दलहन–तिलहन फसलों की खेती में लागत कम और मुनाफे की संभावना अधिक होने से किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त मिट्टी की उर्वरता में सुधार, फसल विविधीकरण को बढ़ावा, दीर्घकालीन जल संरक्षण, जलवायु अनुकूल खेती, जैसे बहुआयामी लाभ भी सुनिश्चित हो रहे हैं।किसानों ने जताया प्रशासन के प्रति आभार

ग्राम के किसानों का कहना है कि वे वर्षों से परंपरागत खेती तक ही सीमित थे, लेकिन कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन की समय पर की गई पहल, तकनीकी सहयोग और भरोसे ने उन्हें नवाचार के लिए प्रेरित किया। आज ग्राम अंधियारखोर टिकाऊ कृषि एवं जल-संरक्षण आधारित खेती का सशक्त उदाहरण बन चुका है।

अन्य गांवों के लिए प्रेरणास्रोत बना अंधियारखोर

ग्राम अंधियारखोर की यह उपलब्धि यह सिद्ध करती है कि सही समय पर लिए गए निर्णय, प्रशासन और किसानों के बीच मजबूत समन्वय तथा सामूहिक प्रयास से कृषि क्षेत्र में स्थायी और सकारात्मक बदलाव संभव है। यह सफलता बेमेतरा जिले के अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणादायी मार्गदर्शक सिद्ध होगी। जिला प्रशासन बेमेतरा द्वारा भविष्य में भी ऐसे प्रयासों को निरंतर प्रोत्साहित करने का संकल्प लिया गया है, ताकि जिले को जल-संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि का मॉडल जिला बनाया जा सके।

 

 

 

 

 

Shailendra Gupta

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