बेमेतराछत्तीसगढ़

जिला बेमेतरा के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता लाने नई पहल

आयुष विभाग और जिला चिकित्सालय के संयुक्त प्रयास से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए किया जा रहा प्रेरित

बेमेतरा, 12 मार्च 2026 । स्वास्थ्य विभाग जिला बेमेतरा के ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य जागरूकता लाने आयुष विभाग एवं जिला चिकित्सालय द्वारा संयुक्त प्रयास से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने हेतु प्रेरित करने विशेष अभियान चलाया जा रहा है। यह जागरूकता अभियान

छत्तीसगढ़ शासन संचालनालय आयुष विभाग तथा राष्ट्रीय आयुष मिशन अंतर्गत संचालित जिला चिकित्सालय बेमेतरा के एनसीडी क्लीनिक द्वारा आयुष विभाग के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता लाने संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य आम नागरिकों को जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से स्वस्थ जीवन जीने के लिए प्रेरित करना है। यह जागरूकता अभियान जिला कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई के निर्देश पर सीएमएचओ डॉ अमृत लाल रोहलेडर एवं जिला आयुष अधिकारी डॉ वीणा मिश्रा के साथ सिविल सर्जन डॉ लोकेश साहू के मार्गदर्शन में व आयुष विभाग से डॉ चिरंजीवी वर्मा आयुर्वेद चिकित्सक एवं विशेषज्ञ पंचकर्म के साथ योग एवं प्राकृतिक चिकित्सक डॉ भूमिका साहू के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है।

आज के समय में बदलती जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा, लीवर और किडनी से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। चिकित्सा विज्ञान में इन बीमारियों को गैर-संक्रामक रोग (NCD) कहा जाता है। ये बीमारियां धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित करती हैं और समय रहते ध्यान न देने पर गंभीर रूप ले सकती हैं।

इसी उद्देश्य से एनसीडी क्लीनिक द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है ताकि वे छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज न करें और समय रहते अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकें। जनवरी माह से अब तक पेंड्रितराई, जेवरा, मोहरेंगा, कुसुमी, वृद्धाश्रम बेमेतरा, कोबीया, पिकरी, विद्यानगर तथा मानपुर सहित विभिन्न स्थानों पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से ऐसे लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाई जा रही है जो किसी कारणवश अस्पताल तक नहीं पहुंच पाते या अपनी छोटी समस्याओं को सामान्य समझकर अनदेखा कर देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि गैस, एसिडिटी, अपच, थकान और सिरदर्द जैसी समस्याओं को यदि लगातार नजरअंदाज किया जाए तो आगे चलकर ये बड़ी बीमारियों का कारण बन सकती हैं।

“ आपका भोजन ही आपकी सबसे बड़ी दवा है”

आयुर्वेद चिकित्सक (पोस्ट ग्रेजुएट) डॉ. चिरंजीवी ने बताया कि आज के समय में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां समाज के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, स्ट्रोक, कैंसर, लीवर तथा किडनी से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं और इनका प्रमुख कारण हमारी गलत जीवनशैली और खान-पान की आदतें हैं।

उन्होंने कहा कि यदि हम अपने दैनिक जीवन में संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और शारीरिक गतिविधियों को शामिल करें तो इन बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है।

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा,

“यदि हम अपने भोजन को संतुलित और प्राकृतिक रखें तो वही भोजन हमारे शरीर के लिए सबसे बड़ी दवा बन सकता है।”

 रोग के अनुसार ही करें योगाभ्यास

जिला चिकित्सालय बेमेतरा एनसीडी क्लीनिक में पदस्थ योग एवं प्राकृतिक चिकित्सक डॉ. भूमिका साहू ने बताया कि समाज में योग के बारे में कई भ्रांतियां फैली हुई हैं। बहुत से लोग यह मानते हैं कि सभी प्रकार के योगासन और प्राणायाम हर व्यक्ति के लिए समान रूप से लाभदायक होते हैं, जबकि ऐसा नहीं है।

उन्होंने कहा कि योगाभ्यास हमेशा व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और रोग के अनुसार ही करना चाहिए।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जिन लोगों को उच्च रक्तचाप की समस्या होती है, उन्हें कपालभाति और भस्त्रिका जैसे तीव्र प्राणायाम से बचना चाहिए, क्योंकि इससे रक्तचाप बढ़ सकता है। इसी प्रकार कई रोगों में कुछ योगासन लाभकारी होते हैं, जबकि कुछ योगासन नहीं करने चाहिए। इसलिए योग का अभ्यास विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही करना उचित होता है।

 प्रकृति से जुड़कर ही संभव है बेहतर स्वास्थ्य

डॉ. भूमिका साहू ने प्राकृतिक चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा उतनी ही पुरानी है जितनी यह प्रकृति स्वयं है। जब आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां विकसित नहीं हुई थीं, तब भी लोग प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर स्वस्थ जीवन जीते थे।

उन्होंने कहा कि जल, मिट्टी, वायु, सूर्य, पेड़-पौधे और प्राकृतिक रंग जैसे तत्व हमारे जीवन के आधार हैं और यही तत्व हमारे स्वास्थ्य की रक्षा भी करते हैं। लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग धीरे-धीरे प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं, जिसके कारण कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।

उन्होंने बताया कि कई छोटी समस्याओं का समाधान घर में उपलब्ध साधारण चीजों से भी किया जा सकता है। उदाहरण के लिए गैस या एसिडिटी होने पर तुरंत दवा लेने की बजाय घर में उपलब्ध जीरा, अजवाइन, सौंफ और धनिया का पानी पीने से पाचन तंत्र को लाभ मिलता है और गैस तथा एसिडिटी में राहत मिल सकती है।

इसी प्रकार शरीर में दर्द होने पर गर्म और ठंडे पानी से सेक करने जैसे सरल उपाय भी काफी राहत दे सकते हैं।

 सभी चिकित्सा पद्धतियों का अपना महत्व

विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि योग, प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद अपनाने का अर्थ यह नहीं है कि एलोपैथिक चिकित्सा का महत्व कम है। आपातकालीन परिस्थितियों में एलोपैथिक चिकित्सा जीवनरक्षक सिद्ध होती है।

तेज बुखार, तीव्र दर्द या गंभीर बीमारी की स्थिति में डॉक्टर से परामर्श लेना और आवश्यक दवाइयां लेना अत्यंत आवश्यक है। सभी चिकित्सा पद्धतियां अपने-अपने स्थान पर महत्वपूर्ण हैं और इनका उद्देश्य मानव स्वास्थ्य की रक्षा करना है।

 स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में प्रयास

आयुष विभाग और जिला चिकित्सालय के संयुक्त प्रयास से चलाया जा रहा यह जागरूकता अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इस पहल के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि यदि वे अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव करें, संतुलित आहार लें, नियमित योग करें और प्रकृति के साथ जुड़कर जीवन जीएं, तो वे कई गंभीर बीमारियों से स्वयं को बचा सकते हैं और एक स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Shailendra Gupta

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