मुंगेली, 15 दिसम्बर 2025 । बच्चों में होने वाले मधुमेह, जिसे टाइप-1 डायबिटीज (बाल मधुमेह) की समय पर पहचान, प्रभावी उपचार एवं समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जिला स्वास्थ्य विभाग एवं यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों एवं मितानिन प्रशिक्षकों के लिए दो दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिला पंचायत के सभा कक्ष में दो चरणों में आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को टाइप-1 डायबिटीज के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव, इसकी प्रारंभिक पहचान, समुचित उपचार एवं समग्र प्रबंधन से संबंधित तकनीकी जानकारी प्रदान करना था, ताकि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में बेहतर एवं संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा सकें।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को बाल मधुमेह की पहचान, उपचार एवं प्रबंधन, काउंसलिंग तकनीक, रोगी सहायता समूहों की भूमिका, समुदाय आधारित जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य एवं पारिवारिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। समूह गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और व्यावहारिक समस्याओं पर चर्चा की। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शीला साहा ने कहा कि यह प्रशिक्षण बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण एवं उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक सराहनीय और प्रेरणादायक पहल है। इससे जमीनी स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

यूनिसेफ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह के नेतृत्व में यूनिसेफ की टीम द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में शत-प्रतिशत सहभागिता रही, जो निकट भविष्य में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित बच्चों एवं उनके परिवारों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। कार्यक्रम में डॉ. प्रदीप, डॉ. शिवपाल, जिला कार्यक्रम प्रबंधक गिरीश कुर्रे, जिला प्रशिक्षण समन्वयक उदय एवं यूनिसेफ टीम शामिल रहे।

 

 

 

 

 

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By Shailendra Gupta

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