मुंगेली, 15 दिसम्बर 2025 । कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) मुंगेली द्वारा रबी मौसम के अंतर्गत जीरो टिल सीड ड्रिल मशीन से गेहूं की बुवाई का सफल एवं प्रभावी प्रदर्शन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को बिना जुताई के समय पर गेहूं बुवाई की आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीक से अवगत कराना था। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि जीरो टिलेज तकनीक के माध्यम से धान कटाई के तुरंत बाद खेत की जुताई किए बिना गेहूं की सीधी बुवाई की जा सकती है। इस पद्धति से खेत में उपलब्ध नमी का बेहतर उपयोग होता है, जिससे अंकुरण अच्छा होता है और फसल की प्रारंभिक बढ़वार मजबूत होती है। साथ ही इस तकनीक से डीजल, समय एवं श्रम की उल्लेखनीय बचत होती है।

प्रदर्शन के दौरान किसानों को बताया गया कि जीरो टिल सीड ड्रिल मशीन से बीज एवं उर्वरक एक साथ डाले जाते हैं, जिससे फसल को प्रारंभ से ही आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं। यह तकनीक पराली जलाने की समस्या से भी निजात दिलाती है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। कृषि विज्ञान केंद्र के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. थानेश्वर कुमार देवांगन ने जानकारी दी कि इस पद्धति को अपनाने से गेहूं की खेती में 25 से 30 प्रतिशत तक लागत में कमी आती है। परंपरागत खेती की तुलना में किसानों को 02 से 03 हजार रुपये प्रति एकड़ तक की बचत होती है, जबकि उत्पादन सामान्य विधि से बोए गए गेहूं के बराबर प्राप्त होता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे जीरो टिलेज तकनीक को अपनाकर समय, लागत और संसाधनों की बचत करें तथा गेहूं उत्पादन को अधिक लाभकारी बनाएं। यह तकनीक न केवल आर्थिक रूप से उपयोगी है, बल्कि जल संरक्षण एवं पर्यावरण संतुलन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 

 

 

 

 

 

 

 

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By Shailendra Gupta

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