पांडातराई – एक ऐसा अधिकारी जो शासन और प्रशासन से नहीं डरता और मनमानी करता है | जी हाँ आज हम अपने पाठकों को एक ऐसे अधिकारी के कार्य के बारे में बतायेगें जिसे जानकर आपको यह लगेगा कि इस अधिकारी को किसी से भी कोई डर नहीं लगता और वह अपनी मर्जी का बादशाह है |जिक्र यहाँ पर नगर पांडातराई में स्थित एवं संचालित होने वाले शासकीय कार्यालय वन परिक्षेत्र अधिकारी – तरेगांव की हो रही है | वर्तमान में यहाँ वन परिक्षेत्र अधिकारी के पद पर अशोक झरिया पदस्थ है |सुपर समर्थन की चिठ्ठी की टीम जब इस कार्यालय में पहुँची तो वन परिक्षेत्र अधिकारी के संबंध में जो जानकारी सामने आई वो उनके मनमानीपूर्ण आचरण को साबित करने के लिए पर्याप्त है |सबसे पहले हम अपने पाठकों को नगर पांडातराई के बारे में बता दे कि यह जिला कबीरधाम का एक नगर पंचायत है | यह कवर्धा – बिलासपुर मुख्य मार्ग के किनारे और जिला मुख्यालय कवर्धा से लगभग 21 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है |वन परिक्षेत्र अधिकारी अशोक झारिया अपने मुख्यालय पांडातराई में निवास नहीं करते और कवर्धा में निवास करने की बात सामने आई | ऐसे में स्वभाविक रूप से शासन के जन कल्याणकारी योजना के सही समय में संचालन करने में विलंब होता होगा जिसका प्रतिकूल प्रभाव उन हितग्राहियों के हितों में भी पड़ता होगा क्योंकि ज्यादा समय तो इस अधिकारी के द्वारा कवर्धा से पांडातराई आने – जाने में जाया किया जा रहा है |कार्य दिवस में एक अधिकारी के पास मिलने के लिए आम जनता , उसके अधीनस्थ कर्मचारी , पत्रकार वर्ग , सूचना का अधिकार के कार्यकर्ता , विभाग से जुड़े ठेकेदार सहित अन्य लोग एवं अन्य वर्गों के लोग आते हैं | वन परिक्षेत्र अधिकारी के मुख्यालय से दूर रहने के कारण इनके कामों एवं हितों में भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है |आखिर में ये सवाल उठते हैं कि अशोक झारिया अपने मुख्यालय में निवास क्यो नहीं करते ? क्या इनके इस तरह आने – जाने के संबंध में इनके उच्चाधिकारियो को कोई जानकारी नहीं है ? या जानकारी होने के बाद भी किन कारणों से चुप्पी साधे हुए हैं ? ये सभी अभी अनुत्तरित है | Post navigationएकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन की अंतिम तिथि अब 15 नवंबर तक