कबीरधाम – ग्राम बिड़ोरा का शासकीय प्राथमिक शाला का भवन इस आधुनिक युग में अत्यधिक जर्जर अवस्था में है | सुपर समर्थन की चिट्ठी ने जब विद्यालय पहुंचकर देखा तो यह पाया कि ग्राम बिड़ोरा में स्थित शासकीय प्राथमिक शाला का भवन इस आधुनिक युग में अत्यधिक जर्जर अवस्था में है |                                                                                                       इस विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी इस भवन में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं | वहां मौजूद एक शासकीय शिक्षक ने सुपर समर्थन की चिट्ठी से चर्चा करते हुए बताया कि वर्तमान में जिस भवन में शासकीय प्राथमिक शाला का संचालन किया जा रहा है वह भवन बहुत ही पुराना है | यह भवन सन 1901 में बना है | यह भवन ब्रिटिश सरकार के समय का है | इस भवन का उपयोग तत्कालीन ब्रिटिश सरकार न्यायालय के रूप में करती थी |

उल्लेखनीय है कि ग्राम बिड़ोरा जिला मुख्यालय कवर्धा से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है | यह ग्राम जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा के अंतर्गत है | यह ग्राम कवर्धा राजनांदगांव मुख्य मार्ग के किनारे स्थित है | कवर्धा राजनांदगांव मुख्य मार्ग के किनारे स्थित होने के बावजूद ग्राम के इस शाला भवन में शिक्षा विभाग की नजर अभी तक नहीं गई है |

वर्तमान में शासकीय प्राथमिक शाला के इस भवन को देखने से यह स्पष्ट रूप से दिखता है कि भवन के ऊपर लेंटर ढला हुआ है जो की पतला एवं कमजोर अवस्था में है | इस भवन के सामने की ओर बरामदा बनाया गया है जिसके ऊपर खपरा लगाया गया है | इस भवन के पीछे ऊपर में नालीदार टीन का शीट डाला गया है | भवन के दीवारों में कई जगह दरारें हैं | दीवारों में दरारे होने से सांप बिच्छू एवं अन्य जहरीले कीड़े के घुसने की पूरी संभावना रहती है | इस भवन के जिस हिस्से में खपरा डाला गया है उसमें से कुछ भाग तो पूरी तरह खुला हुआ है | खपरा से छत को पूरा नहीं ढका गया है | शाला भवन के छत की ऐसी स्थिति होने से वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को तकलीफों का सामना करना पड़ता है | गर्मी के मौसम में धूप बरसात के मौसम में पानी एवं ठंड के मौसम में ठंड से उन्हें तकलीफ होती है | यह भवन आज जिस तरह से जर्जर अवस्था में है उसे देखते हुए इसे तोड़कर नया भवन निर्माण करने की आवश्यकता है |

विद्यार्थियों के लिए जिस कमरे में मध्यान्ह भोजन तैयार किया जाता है वह कमरा भी बहुत छोटा है | ईंधन के रूप में लकड़ी का उपयोग किया जाता है | लकड़ी का उपयोग करने से उस कमरे में धुआं भर जाता है | मध्यान्ह भोजन महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा तैयार किया जाता है | उससे जुड़ी एक महिला ने चर्चा के दरमियान बताया कि लगभग 11 साल से हम ईंधन के रूप में लकड़ी का उपयोग करते आ रहे हैं | इस 11 साल में हमने कभी गैस स्टोव एवं गैस सिलेंडर नहीं देखा है |

भवन की इस स्थिति से शिक्षा विभाग का अनजान होना समझ से परे है | ऐसे में क्या शिक्षा विभाग किसी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है ?

 

 

 

Avatar photo

By Shailendra Gupta

supersamarthankichitthi.in छत्तीसगढ़ आधारित न्यूज़ पोर्टल है, जो राजनीति, शिक्षा, खेल, मनोरंजन और स्थानीय खबरों की ताज़ा व विश्वसनीय जानकारी प्रदान करता है।