कवर्धा, 05 जून 2025। राज्य शासन द्वारा कृषकों को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत जिले में निरंतर रूप से कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखण्ड कवर्धा के ग्राम दौजरी एवं रवेली में कृषि रथ का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में संयुक्त संचालक कृषि, दुर्ग संभाग गोपिका गबेल, तथा अन्य जनप्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में कृषकगण शामिल हुए। मुख्य अतिथि चंद्रवंशी ने उपस्थित किसानों से खरीफ 2025 की तैयारी के संबंध में संवाद स्थापित करते हुए खेती-किसानी से जुड़ी समस्याओं के समाधान हेतु मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कृषकों से अपील की कि वे वैज्ञानिक तरीकों और उन्नत तकनीकों को अपनाकर खेती में उत्पादन बढ़ाएं तथा कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र से समय-समय पर तकनीकी सलाह लेते रहें।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को 17 प्रतिशत नमक घोल द्वारा बीज शुद्धिकरण की विधि एवं वेस्ट डि-कम्पोजर के उपयोग की जानकारी जीवंत प्रदर्शन के माध्यम से दी गई। इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीजों के चयन और जैविक अपशिष्ट प्रबंधन की प्रभावशाली विधियों की व्यवहारिक समझ मिली। संयुक्त संचालक कृषि गोपिका गबेल ने कृषकों को वर्तमान में डीएपी खाद की सीमित उपलब्धता को देखते हुए वैकल्पिक उर्वरकों जैसे 12ः32ः16, 20ः20ः0ः13 एवं एसएसपी आदि का प्रयोग करने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से उर्वरक उठाव की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी। इस अवसर पर कृषि उप संचालक अमित कुमार मोहंती, कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख बी.पी. त्रिपाठी, डीपीडी सुशील वर्मा, कृषि विकास अधिकारी एन.के.एस. नरवरिया, सहित कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित रहे।

अध्यक्ष चंद्रवंशी ने यह भी जानकारी दी कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के अंतर्गत कृषि रथ 29 मई से 12 जून 2025 तक जिले के 78 पूर्वनिर्धारित ग्रामों का भ्रमण कर रहा है, जहां कृषि और समवर्गीय विभागों के विशेषज्ञों द्वारा किसानों को खरीफ फसलों की उन्नत तकनीकों, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरकों के प्रयोग, फसल बीमा योजना, सरकारी योजनाओं व नीतियों की जानकारी दी जा रही है। अभियान के अंतर्गत कृषकों से फीडबैक लेकर उनके द्वारा किए गए नवाचारों पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विमर्श करते हुए कृषि अनुसंधान की दिशा में आवश्यक सुझाव भी संकलित किए जा रहे हैं। इस समावेशी प्रयास से जिले के कृषकों को जागरूक, प्रशिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सशक्त पहल की जा रही है।

 

 

 

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By Shailendra Gupta

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