बोड़ला – सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 को लेकर अनुविभागीय अधिकारी (सामान्य) बोड़ला के द्वारा मनमानी की जा रही है | यहाँ पर यह उल्लेख करना भी जरूरी है कि प्रशासनिक व्यवस्था में अनुविभागीय अधिकारी (सामान्य) ही अनुविभागीय दंडाधिकारी होता है | इस तरह एक अधिकारी के पास दोहरी जिम्मेदारी होती है | यह पद राजस्व एवं न्याय व्यवस्था से सीधा जुड़ा रहता है | तहसील बोड़ला में इस महत्वपूर्ण पद पर एक महिला अधिकारी है | अधिकारी का नाम रुचि शार्दुल है |
आपको यह बता दे कि नगर बोड़ला जिला कबीरधाम का एक नगर पंचायत एवं तहसील है | जिला मुख्यालय कबीरधाम से लगभग 21 किलोमीटर की दूरी पर यह स्थित है । रायपुर जबलपुर राष्ट्रीय मार्ग के किनारे यह नगर स्थित है |

मामला का विस्तार कुछ इस तरह से है | दिनांक 23/04/2025 को आवेदक शैलेंद्र गुप्ता निवासी ग्राम महाराजपुर द्वारा एक आवेदन पत्र सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत तहसील कार्यालय बोड़ला में लगाया गया | इस आवेदन पत्र का तीस दिन 22 मई को पूर्ण होता है | इस आवेदन पत्र में वर्ष 2010 से लेकर आजतक ( आवेदन पत्र लगाने की तिथि तक) की स्थिति में तहसील बोड़ला के ग्रामों में प्रतिवर्ष ग्रामीणों के द्वारा ग्राम की भूमि में अतिक्रमण किया जा रहा है | अतः वर्षवार अतिक्रमण क्षेत्रों की सूची, ग्रामवार, वर्षवार, रकबा क्रमांक एवं नक्शा की कॉपी अतिक्रमणकर्ताओं के नामों सहित चाही गई थी
उक्त आवेदन पत्र के संदर्भ में तहसीलदार एवं जन सूचना अधिकारी, बोड़ला ने अपने पत्र क्रमांक 630 दिनांक 28/05/2025 में लेख किया है कि आवेदन का स्वरूप सूक्ष्म एवं सुस्पष्ट् होना चाहिए | प्रस्तुत आवेदन अस्पष्ट है | अतः विशिष्टियाँ विनिर्दिष्ट करें | जिससे जानकारी उपलब्ध कराई जा सके |
आपकी जानकारी के लिए बता दे कि तहसील बोड़ला में तहसीलदार के पद पर भी एक महिला है | इस महिला अधिकारी का नाम राजश्री पांडेय है | तहसील कार्यालय बोड़ला के तहसीलदार द्वारा आवेदक को मांगी गई जानकारी नहीं दी गई | 22 मई को तीस दिन पूर्ण होता है परंतु छः (06) दिन का विलंब कर 29 मई को संदर्भित पत्र क्रमांक 630 दिनांक 28/05/2025 भेजा गया | सुरक्षा की दृष्टि से अधिकारियों के पत्रों के हस्ताक्षर को मिटाया गया है |
जन सूचना अधिकारी के इस नियम विरुध् कार्य से क्षुब्ध होकर आवेदक ने प्रथम अपीलीय अधिकारी अनुविभागीय अधिकारी (सामान्य) एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी रुचि शार्दुल के पास दिनांक 04/06/2025 को प्रथम अपील कर दिया | हद तो तब हो गई जब प्रथम अपीलीय अधिकारी ने भी सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के नियमोें का कोई पालन नही करते हुए मनमानी का परिचय दिया |
अपीलार्थी शैलेंद्र गुप्ता को अपील प्रकरण की सुनवाई के लिए एक बार भी नही बुलाया गया | जबकि सुनवाई के लिए तीन अवसर देना था | अपिलार्थी एवं प्रतिअपिलार्थि दोनों पक्षों को सुनकर एवं प्रथम अपील का आदेश पारित कर अपिलार्थी एवं प्रतिअपिलार्थी दोनों को आदेश की प्रति देना था परंतु ऐसा नहीं किया गया | प्रथम अपील आदेश की जगह पर अपीलार्थी को ज्ञापन क्रमांक 984 दिनांक 06/06/2025 दिया गया | साथ ही आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी जन सूचना अधिकारी (तहसीलदार) के जरिए आवेदक (शैलेंद्र गुप्ता) को दिलवाना था लेकिन कोई जानकारी नही दिलवाई गई | आधारयुक्त अपील आवेदन को निराधार बता दिया गया |
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों का इस तरह का उपेक्षापूर्ण रवैया आज आवेदक को अतिरिक्त खर्च कर राज्य सूचना आयोग जाने को बाध्य कर रहा है | इस तरह से आवेदक को परेशान करने की मंशा भी हो सकती है |








