खेल शिक्षकविहीन विद्यालय में भेजा गया खेल सामग्री | इसकी उपयोगिता को लेकर उठ रहे अनेक सवाल |
ऐसे में कौन देगा विद्यार्थियों को खेल का प्रशिक्षण ? खेल सामग्री में कोई खेल तो नही ? जगहँसाई का बना यह एक विषय |
सहसपुर लोहारा – एक ऐसा विद्यालय जहाँ खेल शिक्षक नही है लेकिन वहाँ समग्र शिक्षा विभाग ने खेल सामग्री दिया है |
जी हाँ हम बात कर रहे हैं ग्राम उड़िया खुर्द स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के बारे में | सबसे पहले हम आपको यह बता दे कि जिला कबीरधाम के जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा के अंतर्गत ग्राम उड़िया खुर्द आता है | यह ग्राम जिला मुख्यालय कवर्धा से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर कवर्धा – राजनांदगाँव मुख्य मार्ग के किनारे स्थित है | दिनांक 23/06/2007 को यहाँ हाई स्कूल की स्थापना हुई है और 17/10/2007 को शाला प्रारंभ हुआ | 22/09/2009 से यहाँ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की स्थापना हुई | इस विद्यालय के लिए संकुल ग्राम उड़िया कला है |
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यहाँ पी टी आई का पद स्वीकृत नहीं है तो ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि यहाँ पढ़ने वाले विद्यार्थियों ( छात्र एवं छात्रा ) को सही तरीके से खेलना कौन सिखायेगा ? उन्हें खेल संबंधी नियम कौन बतायेगा ? ऐसे परिस्थिति में यह खेल एवं खेल सामग्री सिर्फ टाइम पास ( समय व्यतीत ) का एक माध्यम बन जायेगा | यहाँ के विद्यार्थी खेल के क्षेत्र में कोई विशेष उपलब्धि हासिल नहीं कर सकेंगे | बिना खेल के विद्यार्थीयों के शारीरिक एवं मानसिक विकास की कल्पना नही की जा सकती है क्योंकि स्वस्थ तन में स्वस्थ मन रहता है | कोविड् काल से पूर्व यहाँ के खिलाडियों ने किसी स्थान में खेल प्रतियोगिता में भाग भी लिया तो मात्र एक खिलाड़ी का औपचारिकता भर निभा कर वापस आ गए | कोविड् काल से लेकर आजतक यहाँ के विद्यार्थी कही भी खेल का प्रदर्शन नही कर पाए हैं |
ये खेल सामग्री दीपावली त्यौहार के बाद मिला है | ऐसे में गौर करने वाली बातें ये हैं कि विद्यालय में पढ़ाई प्रारंभ हुए लगभग तीन – चार माह हो चुके हैं इसका मतलब है कि शिक्षा सत्र लगभग आधा बीत चुका है और अर्धवार्षिक परीक्षा काफी नजदीक है तो ऐसे में विद्यार्थी खेल खेलें कि परीक्षा की तैयारी करें | यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि यहाँ विद्यार्थियों का भविष्य ही खेल बन गया है |
सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई कि इन खेल सामग्रियों को सहसपुर लोहारा जाकर लाना पड़ता है | इसके लिए अलग से अतिरिक्त व्यय करना पड़ता है | इस काम के लिए ना तो यात्रा भत्ता मिलता ना ही दैनिक भत्ता | खेल सामग्री विद्यालय की केवल शोभा बढ़ा रहे हैं लगता है खेल सामग्री में ही खेल हो गया है ? जिला कबीरधाम में राज्यस्तरीय एवं अंतरराज्यीय स्तर पर खेल कूद का आयोजन होते रहता है | खेल शिक्षकविहीन विद्यालय के विद्यार्थी कैसे इन आयोजनों में भाग लेते होंगे ? फिर कहाँ के विद्यार्थी बड़े स्तर के प्रमाण पत्र प्राप्त करते हैं ? ग्राम उड़िया खुर्द के विद्यार्थी ऐसे प्रमाणपत्रों से वंचित होकर भेदभाव के शिकार हो रहे हैं | खेल के प्रमाणपत्रों से खिलाड़ी को बोनस अंक , नकद राशि, सम्मान प्राप्त होता है एवं मनोबल में वृद्धि होती है | ऐसे प्रमाणपत्रों से शासकीय नौकरी की भी प्राप्ति होती है | यहाँ के विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है | ऐसे में यह प्रतीत हो रहा है कि जिले के कुछ खास गिने – चुने विद्यालयों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है |
क्या खेल के विभिन्न स्तरों के आयोजन शिक्षा विभाग के अधिकारियों सहित कुछ अन्य विभाग के अधिकारी एवं नेताओं के लिए मंच में बैठकर सिर्फ फोटो खिचवाने एवं झूठी वाहवाही लेने का महज माध्यम बनकर रह गए है ?






