मुंगेली, 03 फरवरी 2026।  पथरिया विकासखण्ड के सरंगॉव के समीप ग्राम खम्हारडीह स्थित मेरु चक्र पीठम गौशाला में इविसरेशन से ग्रसित बछिया का सफल आपरेशन किया गया। उप संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, डॉ. आर. एम. त्रिपाठी ने बताया कि सामान्यतः पशुओं में जन्म के समय सभी आंतरिक अंग उदर के भीतर सुरक्षित रूप से स्थित रहते हैं, किंतु गर्भावस्था के दौरान विकास संबंधी किसी असामान्यता के कारण यदि आमाशय, यकृत (लीवर) अथवा आंतें उदर के बाहर विकसित होकर जन्म के समय बाहर ही बनी रहें, तो इस स्थिति को इविसरेशन कहा जाता है। यह एक अत्यंत दुर्लभ एवं जटिल जन्मजात विकृति है, जिसमें नवजात को जीवित रखना प्रायः असंभव माना जाता है।

डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि ग्राम खम्हारडीह में एक गाय ने इविसरेशन से ग्रसित बछिया को जन्म दिया। जन्म के समय ही बछिया के आमाशय, लीवर तथा आंतें उदर के बाहर दिखाई दे रही थीं। इस गंभीर स्थिति की सूचना मिलने पर विस्तृत परीक्षण के उपरांत उसी रात्रि स्थल पर ही शल्य क्रिया करने का निर्णय लिया। अत्यंत सावधानी एवं वैज्ञानिक विधि से सभी बाहर निकले अंगों को पूर्ण रूप से पुनः उदर के भीतर स्थापित किया गया। यह शल्य क्रिया तकनीकी रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि सामान्यतः ऐसे मामलों में नवजात को बचा पाना दुर्लभ होता है। पशु चिकित्सकों की तत्परता, अनुभव और समर्पण के चलते यह शल्य क्रिया सफल रही, जो क्षेत्र में पशु चिकित्सा विभाग के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।

 

 

 

 

 

 

 

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By Shailendra Gupta

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