जांजगीर-चांपा, 25 नवम्बर 2025 । जिले के सोनसरी गांव के निवासी मनराखन निर्मलकर के जीवन में वह पल आखिरकार आया, जिसका वे वर्षों से इंतजार कर रहे थे। गरीब परिवार से होने के कारण वे जर्जर कच्चे मकान में रह रहे थे जहां बरसात में टपकती छत, भीगती दीवारें और असुरक्षित रहने की मजबूरी उनके परिवार के लिए रोज़ की चुनौती थी। सीमित आय और आर्थिक तंगी के चलते ‘पक्के घर’ का सपना उनके लिए लगभग असंभव था।

लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण ने उनके जीवन में उम्मीद की किरण जगाई। वर्ष 2024-25 में उन्हें 1.20 लाख रुपए की स्वीकृत राशि मिली, और इसी क्षण से उनके सपनों के घर का निर्माण शुरू हुआ। निर्माण के दौरान उन्हें महात्मा गांधी नरेगा के माध्यम से 90 दिवस की मजदूरी का भुगतान किया गया। इसके साथ ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत जलवाहित शौचालय और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से एलपीजी गैस कनेक्शन मिला, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता और बेहतर हो गई। शासन की योजनाओं का यह समन्वय उनके लिए सुविधा, सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक बन गया।

आज वे अपने नवनिर्मित पक्के घर में सुरक्षित, स्वाभिमान पूर्ण और गरिमापूर्ण जीवन जी रहे हैं। उनकी खुशी शब्दों में बयां नहीं होती। वे भावनात्मक होकर बताते हैं गरीबी के कारण घर बनाना मेरे लिए सिर्फ़ एक सपना था। प्रधानमंत्री आवास योजना ने मेरे उस सपने को घर की नींव में बदल दिया। आज मैं और मेरा परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। मैं शासन का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। मनराखन की कहानी यह सिद्ध करती है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण सिर्फ़ घर नहीं देती – बल्कि सुरक्षा, सम्मान, आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य देती है। उनकी यह सफलता ग्रामीण भारत में चल रहे आवासीय परिवर्तन का सशक्त प्रमाण है और यह दिखाती है कि शासन की योजनाएं सही लाभार्थियों तक पहुँच कर उनके जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही हैं।

 

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By Shailendra Gupta

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