पिपरिया – एक ऐसा शासकीय महाविद्यालय जो स्थापना नियम के विपरीत है | जी हाँ हम बात का रहे हैं नगर पंचायत पिपरिया में स्थित महंत श्री रामजानकी शरण दास वैष्णव शासकीय स्नातक महाविद्यालय के बारे में |
सबसे पहले हम आपको यह बता दे कि पिपरिया एक नगर पंचायत है | यह नगर पंचायत जिला मुख्यालय कबीरधाम से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है | कवर्धा – रायपुर मुख्य मार्ग में लगभग 08 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद ग्राम बिरकोना से बाँई ओर मुड़कर और लगभग 03 किलोमीटर की दूरी चलकर पिपरिया पहुँचा जाता है |
वर्तमान में यहाँ डॉक्टर एस. के. श्रीवास प्राचार्य के पद पर पदस्थ हैं | सुपर समर्थन की चिठ्ठी के प्रतिनिधि सुजीत गुप्ता ने दौरा कर जानकारी में पाया कि यह महाविद्यालय निजी जमीन में निर्मित है | इस निजी जमीन का क्षेत्रफल पाँच एकड़ से कम है | जिससे इस महाविद्यालय को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से संबंधता नहीं मिल पा रही है क्योंकि महाविद्यालय के स्थापना के लिए नियम यह कहता है कि महाविद्यालय के पास कम से कम पाँच एकड़ भूमि होनी चाहिए | इस महाविद्यालय के निर्माण हेतु पूर्व में इसे 13 एकड़ भूमि मिला था परन्तु उस प्राप्त भूमि में महाविद्यालय भवन का निर्माण कुछ कारणों से नही करने पर वह 13 एकड़ जमीन निरस्त हो चुका है |
यह महाविद्यालय हेमचंद् यादव विश्वविद्यालय के अधीन है | हेमचंद् यादव विश्वविद्यालय को भी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से संबंधता नहीं मिली है इसलिए इस महाविद्यालय को भी संबंधता नहीं मिल पाई है |
चलिए हम आगे बात करते है रिसर्च सेंटर के बारे में | हम आपको यहाँ पर यह बता दे कि जिला कबीरधाम में संचालित होने वाले किसी भी महाविद्यालय में रिसर्च सेंटर नही है तो जाहिर सी बात है कि पिपरिया स्थित महाविद्यालय में भी रिसर्च सेंटर नही है | रिसर्च सेंटर के नहीं होने से अनेक प्राध्यापक और अध्ययनरत छात्र एवं छात्रा इससे मिलने वाले लाभ से वंचित हो रहे हैं | रिसर्च सेंटर खोलने की अनुमति नियमानुसार संबंधित विश्वविद्यालय ही देता है | यहाँ प्रतिवर्ष 1500 छात्र एवं छात्रा उच्च शिक्षा ग्रहण करते हैं |
इस महाविद्यालय में ग्रंथालय तो है पर ग्रंथपाल का पद स्वीकृत नहीं है | ग्रंथालय के लिए और कमरे की आवश्यकता है | यहाँ कंप्यूटर ओपरेटर पद स्वीकृत नहीं है | यहाँ पर एन. सी. सी. की इकाई नहीं है परंतु रेड क्रॉस और एन. एस. एस. की इकाईयाँ हैं | नियमानुसार प्रति 80 विद्यार्थियों के लिए एक प्राध्यापक का होना जरूरी होता है | इसी तरह प्रति 80 विद्यार्थियों के लिए एक सहायक प्राध्यापक का होना जरूरी है | इस महाविद्यालय में प्राध्यापक के 16 पद स्वीकृत हैं परंतु सिर्फ तीन प्राध्यापकों की नियुक्ति है | खाली पदों की भरपाई अतिथि व्याख्याता की नियुक्ति कर की गई है | जिले में इस महाविद्यालय का परीक्षा परिणाम लगभग 90% रहा है |
महाविद्यालय परिसर में वृहत पैमाने पर एवं सुव्यवस्थित रूप से वृक्षारोपण किया गया है | वृक्षारोपण वाला क्षेत्र छायादार है जिससे यह अस्थायी रूप से एक साइकिल स्टैंड के रूप में उपयोग करते बन रहा है |
इस महाविद्यालय के पास 102 कंप्यूटर सेट हैं जिससे वहाँ अध्ययनरत विद्यार्थी कंप्यूटर का ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं | यहाँ पर एक सेमिनार हाल एवं स्मार्ट कक्षाएं हैं | महाविद्यालय का पूरा परिसर साफ सुथरा है साथ ही यहाँ हमेशा शांति का वातावरण बना रहता है |
इस महाविद्यालय को प्राप्त भूमि को महाविद्यालय के नाम पर हस्तांतरित करने एवं किसान किताब ( पूर्व नाम ऋण पुस्तिका ) प्राप्त करने के लिए यहाँ के प्राचार्य द्वारा जिला कबीरधाम के कलेक्टर को अभीतक 14 बार पत्र लिखा जा चुका है लेकिन ठोस कार्यवाई शून्य है |








