कवर्धा, 9 सितम्बर 2025। कबीरधाम जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की लखपति दीदी विजन को साकार करने की दिशा में एक नई पहल की जा रही है। उपमुख्यमंत्री एवं पँचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के मंशानुरूप कबीरधाम जिले में महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत जिले में कुल 48 नर्सरी तैयार की जाएँगी। इन नर्सरियों का संचालन महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा जाएगा, जिससे उन्हें स्थायी आजीविका के अवसर प्राप्त होंगे और आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाएगा।

समय सीमा बैठक में कलेक्टर गोपाल वर्मा ने इस योजना को प्राथमिकता में लेकर तत्काल क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को ग्राम चयन की विशेष जिम्मेदारी सौंपी। कलेक्टर वर्मा ने कहा कि प्रत्येक नर्सरी को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित किया जाए और पौधों का उपयोग न केवल पंचायतों में रोपण के लिए हो, बल्कि महिला समूह उनकी बिक्री से अतिरिक्त आय अर्जित कर लखपति दीदी के सपने को साकार हो सके।

कलेक्टर ने बताया कि यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करेगी और महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नर्सरी के रखरखाव एवं पौधों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए।

एक पेड़ माँ के नाम अभियान से जुड़ी इस पहल के अंतर्गत जिले के चारों विकासखण्ड कवर्धा, पंडरिया, बोड़ला एवं सहसपुर लोहारा में प्रत्येक 3-3 क्लस्टर बनाकर कुल 12 क्लस्टर तैयार किए गए हैं। प्रत्येक क्लस्टर में 4-4 नर्सरी विकसित की जाएँगी, जिनमें फलदार पौधों के साथ-साथ सब्जी के लिए ग्राफ्टेड पौधे भी तैयार किए जाएँगे।

बैठक में बताया गया कि विकासखण्ड वार क्लस्टर का चयन किया गया है। जनपद पंचायत कवर्धा में कवर्धा, बिरकोना, रवेली, मरका है। जनपद पंचायत बोड़ला में राजानवागांव, पोड़ी, रेंगाखरकला, बैजलपुर है। जनपद पंचायत पंडरिया में कुंडा, कुकदूर, किशुनगढ़, पांडातराई है। जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा में ग्राम पंचायत उड़ियाकला, बिडोरा, बाजार चारभांटा और रणवीरपुर का चयन किया गया है।

इन क्लस्टरों में महिला समूहों को नर्सरी संचालन का दायित्व मिलेगा। नरेगा योजना से स्वीकृत अतिरिक्त राशि का उपयोग पौधों की विविधता एवं ग्राफ्टिंग तकनीक को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा।

कबीरधाम जिले में योजना प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा परिकल्पित लखपति दीदी विजन को जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन होने से महिला स्व-सहायता समूह को आजीविका का मजबूत आधार बनने जा रहा है। नर्सरी विकसित होने के बाद समूह की दीदियों को ना केवल पौधों की बिक्री से आय अर्जित होगी, बल्कि सब्जी उत्पादन एवं अन्य गतिविधियों से भी अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। इस पहल से हजारों ग्रामीण परिवारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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By Shailendra Gupta

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