मुंगेली, 12 मार्च 2026 । जिले के पथरिया विकासखण्ड के ग्राम गोइन्द्री की रहने वाली शांतामणी गेंदले आज गांव की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। कभी आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ से जूझने वाली शांता बाई ने अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और स्व-सहायता समूह के सहयोग से न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। शांतामणी गेंदले संस्कार महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं और ग्राम संगठन व संकुल स्तरीय संगठन (सीएलएफ) में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वर्तमान में वे एफएलसीआरपी (वित्तीय साक्षरता संसाधन व्यक्ति) के रूप में भी कार्य कर रही हैं और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में योगदान दे रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लखपति संवाद कार्यक्रम में शांतामणी गेंदले को सम्मानित किया।

कुछ वर्ष पहले तक शांता बाई का जीवन बेहद कठिन था। सीमित आय और आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी साहूकारों से कर्ज लेना पड़ता था। अधिक ब्याज दर के कारण कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जाता था और परिवार का पालन-पोषण करना भी चुनौतीपूर्ण हो गया था। शांता बाई के जीवन में बदलाव तब आया जब वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत संचालित संस्कार महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत करना सीखा और वित्तीय प्रबंधन की बारीकियों को समझा। समूह के माध्यम से उन्हें रिवॉल्विंग फंड (आरएफ) और सामुदायिक निवेश कोष (सीआईएफ) की सहायता भी प्राप्त हुई। इसके साथ ही बैंक लिंकेज और संकुल स्तरीय संगठन के माध्यम से उन्हें ऋण सुविधा मिली, जिससे उन्होंने अपने जीवन में आर्थिक सुधार की दिशा में कदम बढ़ाए।

शांता बाई ने प्राप्त ऋण राशि का उपयोग केवल घरेलू जरूरतों के लिए न करके आय बढ़ाने वाले कार्यों में निवेश किया। उन्होंने गांव में सिलाई सेंटर शुरू किया, जहां वे सिलाई का काम करती हैं। इसके साथ ही उन्होंने मिनी राइस मिल भी स्थापित की, जिससे गांव में ही धान कुटाई की सेवा उपलब्ध कराने लगीं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप आज वे प्रतिमाह लगभग 20 हजार से 30 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से काफी मजबूत हो गई है। शांता बाई की उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं हैं। एफएलसीआरपी के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने 60 से अधिक समूहों को लगभग 1 करोड़ 38 लाख रुपये की ऋण राशि दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके अलावा उन्होंने 30 समूहों को रिवॉल्विंग फंड दिलाने में मदद की तथा 80 से अधिक समूहों को वित्तीय साक्षरता प्रदान कर बैंकिंग और वित्तीय लेन-देन के प्रति जागरूक बनाया। अब वे न केवल खुद सशक्त हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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By Shailendra Gupta

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