बोड़ला – मनरेगा में बनाये गए तालाब को देखकर आप यह सोचने को मजबूर हो जायेंगे कि यह तालाब है या गड्ढा | जी हाँ हम बात कर रहे हैं एक ऐसे निर्माण कार्य के बारे में जिसे केंद्र एवं राज्य सरकार के योजनानुसार संचालित किया जाता है | महात्मा गॉंधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना केंद्र एवं राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण एवं जनकल्याणकारी योजना है | जिसका संक्षिप्त नाम मनरेगा है | इस योजना की शुरुआत सन् 2005 में हुई | उस समय केंद्र में यूपीए वन की सरकार थी | उस समय देश के वामपंथी दलों (कम्यूनिस्ट पार्टियां) ने अपने कुछ शर्तों पर केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन देने का निर्णय लिया | इनमें से एक शर्त न्युनतम साझा कार्यक्रम को लागू करना भी था | जिसमें से एक मनरेगा भी है | मजदूरों एवं देशहित में इस योजना को लागू करने के पीछे यह उद्देश्य था कि देश के मजदूरों को रोजगार मिलना निश्चित हो | निर्धारित समयावधि में उन्हें मजदूरी मिले | मजदूरों का पलायन रुके साथ ही देश में विकास कार्य हों |https://supersamarthankichitthi.in/wp-content/uploads/2025/06/VID_20250619_140117.mp4 लेकिन इसे दुर्भाग्य और विडंबना ही कहा जाए कि यह योजना देश के विकास एवं मजदूरों का हित नहीं बनकर चंद अधिकारी, कर्मचारी एवं जनप्रतिनिधीयो का आर्थिक विकास एवं आर्थिक हित का योजना बनकर रह गया है | इन्होंने इसे भ्रष्टाचार का जरिया बनाकर तिजोरीहित का कार्यक्रम बना लिया है |इसका एक जीता जागता उदाहरण है ग्राम पंडरिया में बनाया गया गड्ढानुमा तालाब | यह एक ग्राम पंचायत है | जिला मुख्यालय कबीरधाम से लगभग 75 किलोमीटर की दूरी पर यह ग्राम स्थित है | यह ग्राम जनपद पंचायत बोड़ला के अंतर्गत है |चलिए अब हम आपको जानकारी देते हैं उस निर्माण कार्य (गड्ढेनुमा) तालाब के बारे में | ग्राम पंडरिया में घोघा कन्हार के पास मनरेगा के तहत नया तालाब निर्माण कार्य किया गया है | इस कार्य का प्रशासकीय स्वीकृत राशि एवं दिनांक 174/10/06/2024 राशि 12.578 लाख रुपए है | कार्य का आकार / क्षेत्रफल / लंबाई एवं इकाई नही लिखा गया है | कार्य एजेंसी इसे सार्वजनिक नही करना चाहती है मतलब से छुपाना चाहती है | पूर्ण दिनांक एवं सृजित को भी नही लिखा गया है मतलब इसे भी छुपाया गया है |कार्य एजेंसी ग्राम पंचायत पंडरिया है | तकनीकी सहायक का नाम वैभव श्रीवास्तव, कार्यक्रम अधिकारी का नाम रमेश भास्कर, लोकपाल का नाम संजय श्रीवास्तव एवं सामाजिक अंकेक्षक इकाई अधिकारी विवेक प्रताप सिंह हैं | ये सभी जानकारियां नागरिक सूचना पटल में उल्लेखित हैं |निर्मित गड्ढेनुमा तालाब को जब पास में जाकर देखा गया तो यह तालाब कम नजर आया गड्ढा ज्यादा नजर आया | इस तालाब के चारों ओर एक भी ठोस पार नही है | चारों पार मिट्टी का होने के कारण बहुत कमजोर है | बरसात का पानी भर जाने के बाद अगर इसमें धोके से कोई इंसान या जानवर नीचे उतरता है तो वह नीचे ही रह जायेगा और यह जानलेवा साबित हो सकता है | पीली मिट्टीयुक्त कीचड़ प्रचुर मात्रा में है | इसकी लंबाई, चौड़ाई एवं गहराई को समझना मुश्किल है | पहुँचविहिन् जगह पर इसे बनाया गया है | इसके चारों ओर खेत है | लगभग 100 मीटर के दायरे में ना कोई रहता है ना कोई बसता है | मनरेगा का यह अजीब कारनामा है |Post navigationअंतरराष्ट्रीय योग दिवस: जिला न्यायालय परिसर में किया गया योगाभ्यास रात्रिकालीन क्रिकेट प्रतियोगिता मे विजेता रहा गेंदपुर इलेवन