बेमेतरा 22 मई 2002/- बेमेतरा जिले के ग्राम करंजिया निवासी आठ माह के भास्कर यादव के जीवन की शुरुआत चुनौतियों से भरी थी। जन्म से ही उसके दोनों पैर अंदर की ओर मुड़े हुए थे, जिसे चिकित्सकीय भाषा में क्लबफुट कहा जाता है। यह एक जन्मजात विकृति है, जिससे बच्चे का सामान्य चलना-फिरना असंभव हो जाता है। आर्थिक रूप से सामान्य परिवार से संबंध रखने वाले भास्कर के माता-पिता के लिए यह स्थिति चिंता और पीड़ा का कारण बन गई।

सितंबर 2024 में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत बेमेतरा विकासखण्ड के चिरायु स्वास्थ्य दल द्वारा गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में आयोजित स्वास्थ्य परीक्षण शिविर के दौरान भास्कर की स्थिति की पहचान की गई। इसके बाद स्वास्थ्य कर्मियों ने भास्कर के माता-पिता को चिरायु योजना के तहत मिलने वाले नि:शुल्क इलाज की जानकारी दी और उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थान जिला चिकित्सालय पंडरी, रायपुर रेफर किया गया।

रायपुर में हड्डी रोग विशेषज्ञों की निगरानी में भास्कर के पैरों में आठ सप्ताह तक नियमित प्लास्टर चढ़ाया गया। इसके बाद 22 जनवरी 2025 को टेनोटॉमी नामक शल्य चिकित्सा की गई, जिससे उसकी एड़ी की अकड़ी हुई नसों को ढीला किया गया। ऑपरेशन के पश्चात भास्कर को विशेष जूते भी प्रदान किए गए ताकि उसका इलाज स्थायी रूप से सफल हो सके।

आज भास्कर के दोनों पैर पूरी तरह सीधे हैं और वह सामान्य बच्चों की तरह चलने की दिशा में अग्रसर है। यह सफलता न केवल चिकित्सा विज्ञान की उपलब्धि है, बल्कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और चिरायु योजना की सक्रियता का प्रमाण भी है। नि:शुल्क उपचार और समय पर पहचान ने एक बच्चे के जीवन को नई दिशा दी है

 

 

 

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By Shailendra Gupta

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