जांजगीर-चांपा 06 अक्टूबर 2026 । खेती में नई तकनीक और सही मार्गदर्शन मिलने से किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अधिक लाभकारी कृषि पद्धतियों को अपना रहे हैं। विकासखण्ड पामगढ़ के ग्राम हड़हा निवासी कृषक जितेन्द्र पाण्डेय की कहानी भी इसी बदलाव की मिसाल है। उन्होंने शेडनेट हाउस के माध्यम से सब्जी उत्पादन कर अपनी खेती को अधिक व्यवस्थित और लाभकारी बनाया है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत जितेन्द्र पाण्डेय ने शेडनेट हाउस स्थापित किया। इससे पहले वे सामान्य तरीके से सब्जियों की खेती करते थे। खुले में खेती करने पर कीट एवं रोगों का प्रकोप अधिक होने से फसल सुरक्षा पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता था, जिससे उत्पादन लागत बढ़ जाती थी।

उद्यान विभाग के अधिकारियों से तकनीकी जानकारी एवं मार्गदर्शन प्राप्त करने के बाद उन्होंने संरक्षित वातावरण में सब्जी उत्पादन शुरू किया। शेडनेट हाउस में उन्होंने बैंगन एवं खीरा की खेती की। संरक्षित वातावरण के कारण फसल पर कीट एवं रोगों का प्रकोप अपेक्षाकृत कम हुआ, जिससे कृषि आदानों पर होने वाले खर्च में कमी आई और फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादन में सुधार हुआ। जितेन्द्र पाण्डेय बताते हैं कि आधुनिक तकनीक अपनाने से उन्हें पारंपरिक खेती की तुलना में बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है। शेडनेट हाउस ने न केवल सब्जी उत्पादन को अधिक व्यवस्थित बनाया, बल्कि खेती में होने वाले जोखिम को कम करने में भी मदद की है।

जितेन्द्र पाण्डेय की सफलता अब आसपास के किसानों को भी संरक्षित खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। उनकी कहानी यह बताती है कि किसान की मेहनत के साथ यदि आधुनिक तकनीक और शासन की योजनाओं का सहयोग जुड़ जाए, तो पारंपरिक खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ आजीविका में बदला जा सकता है।

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By Shailendra Gupta

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