कोरबा, 28 अक्टूबर 2025 । कोरबा जिले के पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के सबसे दूरस्थ वनांचल ग्राम पसान के आगे स्थित प्राथमिक शाला तराईनार वर्ष 1997 से शिक्षा की ज्योति जलाए हुए है। घने जंगलों के बीच बसे इस गांव तक पहुंचना आसान नहीं, लेकिन यहां के बच्चों की आँखों में ज्ञान पाने की वही चमक है जो शहरों के विद्यार्थियों में होती है। लंबे समय से यह विद्यालय एकलशिक्षकीय के रूप में संचालित हो रहा था। प्रधानपाठक मना सिंह मेश्राम को अकेले ही पढ़ाई, कार्यालयीन कार्य, मिड डे मील, विद्यालय प्रबंधन और समुदाय से जुड़ी सभी जिम्मेदारियाँ निभानी पड़ती थीं। छुट्टी या बीमारी की स्थिति में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर शुरू की गई अतिशेष शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की पहल ने इस समस्या का समाधान किया। इस योजना के अंतर्गत तराईमार विद्यालय को एक नया शिक्षक तुलसीदास कौशिक का सहयोग मिला। उन्होंने 5 जून 2025 को विद्यालय में जॉइन किया और अब विद्यालय में नई ऊर्जा का संचार हो गया है। आज विद्यालय में 26 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें अधिकांश गरीब और आदिवासी परिवारों से आते हैं। कौशिक बच्चों के साथ जल्दी ही घुल-मिल गए हैं। अब विद्यालय में नियमित कक्षाएँ संचालित हो रही हैं, बच्चों की उपस्थिति बढ़ी है और शिक्षा का माहौल उत्साहपूर्ण हो गया है। यह बदलाव केवल एक शिक्षक के आने भर का नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार की संवेदनशील पहल का परिणाम है, जिसने दूरस्थ अंचल के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाने का रास्ता खोला है।

 

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By Shailendra Gupta

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