कवर्धा – संलग्नीकरण के विचित्र खेल से प्रताड़ित एवं अन्य कमियों की परेशानियों से जूझ रहा है शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इंदौरी |कवर्धा – रायपुर राष्ट्रीय मार्ग के किनारे नगर इंदौरी स्थित है | इसे नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त है | जिला मुख्यालय कवर्धा से यह नगर लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है |आज हम अपने पाठकों को एक ऐसे मामले के बारे में बता रहे है जिसे जानकर हैरान होना स्वाभाविक है | मामला का विस्तार कुछ इस तरह से है | रम्मू सिंह धुर्वे इस विद्यालय में भृत्य के पद पर पदस्थ है | 03 मार्च 2023 से वह अपने मूल संस्था में कार्य नही कर रहा है | उक्त दिनांक से आजपर्यंत वह कार्यालय विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी बोड़ला में कार्य कर रहा है |विद्यालय के प्राचार्य लाला राम साहू ने सुपर समर्थन की चिठ्ठी की टीम से चर्चा करते हुए आगे बताया कि शासन के नियमों को ताक में रखकर यह खेल खेला गया है | शासन के नियम के अनुसार जब किसी कर्मचारी को स्थानांतरण में अन्यत्र भेजा जाता है तो उसे अपनी संस्था से कार्यमुक्त किया जाता है उसके बाद वह भेजे गए संस्था में जाकर कार्यभार ग्रहण करता है | रम्मू सिंह का मामला स्थानांतरण का भी नहीं है और साथ में पहले कार्यमुक्त करना फिर कार्य भार ग्रहण करना वाले नियम का भी घोर उल्लंघन किया गया |https://supersamarthankichitthi.in/wp-content/uploads/2026/07/VID-20260717-WA0002.mp4भृत्य रम्मू सिंह धुर्वे अपने मूल संस्था से कार्यमुक्त नहीं हुआ था और उसे तत्कालीन विकास खंड शिक्षा अधिकारी बोड़ला द्वारा कार्यभार ग्रहण करने दिया गया | दिनांक 15 मार्च 2023 को विद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य ने तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर निवेदन किया कि रम्मू सिंह धुर्वे को संलग्नीकरण के लिए कार्यमुक्त ना किया जाए | इस पत्र में इस बात का भी जिक्र किया गया कि शाला प्रबंधन समिति के तत्कालीन अध्यक्ष भोला राम चंद्रवंशी ने भी रम्मू सिंह धुर्वे को मूल संस्था से कार्यमुक्त करने से मना किया है |हद तो तब हो गई जब यहाँ पदस्थ लिपिक विश्वनाथ तिवारी को भी कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कबीरधाम में संलग्न कर दिया गया | 09 सितंबर 2013 से आजपर्यंत विश्वनाथ तिवारी जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में कार्यरत है | इस अवधि में कई जिला शिक्षा अधिकारियों ने कार्य किया लेकिन इनमें से किसी ने भी विश्वनाथ तिवारी को उसके मूल संस्था में वापस भेजने के लिए ईमानदारी से प्रयास नहीं किया | ना जाने किन कारणों से ये जिला शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ तिवारी पर मेहरबान रहे |संस्था के प्राचार्य ने आगे बताया कि भृत्य एवं लिपिक के अन्य जगहों में कार्य करने से होने वाली परेशानियो के साथ ही विषय शिक्षक एवं कमरों की कमी की तकलीफो को भी सहना पड़ रहा है | आज हमारे विद्यालय में कला संकाय एवं वाणिज्य संकाय के विषयों के लिए एक भी व्याख्याता नहीं है | भूगोल, अर्थशास्त्र एवं राजनीति शास्त्र जैसे विषयों के लिए एक भी शिक्षक नहीं है तो ऐसे में अच्छे परीक्षा परिणाम की अपेक्षा कैसे की जा सकती है ?https://supersamarthankichitthi.in/wp-content/uploads/2026/07/VID-20260717-WA0001.mp4वर्तमान में सात कमरों में कक्षाएं लगाई जा रही हैं इसके अलावा तीन कमरों की नितांत आवश्यकता है | प्राचार्य द्वारा इस विषय में जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित में अवगत कराया गया है लेकिन लगभग छह सात महीने बीत जाने के बावजूद जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कोई ठोस कारर्वाई नहीं किया गया है |Post navigationकेरल का युवक कर रहा है भारत भ्रमण | बहुत कम साधनों के साथ भारत भ्रमण करने का जज्बा | साधारण साइकिल के जरिये कर रहा है देश भ्रमण | विशेष लोक अदालत में 32 प्रकरण निराकृत, 73.43 लाख रुपये की अवार्ड राशि पारित