बेमेतरा, 2 जनवरी 2026 । ग्राम नवागांव, तहसील दाढ़ी, जिला बेमेतरा के प्रगतिशील कृषक छेदी लाल कश्यप ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर यह सिद्ध कर दिया है कि यदि खेती वैज्ञानिक तरीके से की जाए तो वह लाभकारी, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बन सकती है। उनका यह प्रयास न केवल आर्थिक समृद्धि की दिशा में अग्रसर है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करता है।पराली न जलाकर पर्यावरण संरक्षण की मिसालगत वर्ष कश्यप द्वारा लगभग 30 एकड़ क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन धान की खेती की गई थी। धान कटाई के पश्चात उन्होंने परंपरागत तरीके से पराली जलाने के बजाय उसे संग्रहित कर सुरक्षित रखा और उसे अपने 60 मवेशियों के लिए चारे के रूप में उपयोग किया। इस पहल से वायु प्रदूषण एवं भूमि की उर्वरता को होने वाले नुकसान से बचाव हुआ, पशुपालन हेतु चारे की उपलब्धता सुनिश्चित हुई,चारा क्रय पर होने वाला अतिरिक्त खर्च कम हुआ, खेती एवं पशुपालन को एकीकृत कर आय के स्रोत सुदृढ़ हुएफसल विविधीकरण की ओर सार्थक कदमवर्तमान कृषि वर्ष में कश्यप ने एकल फसल पर निर्भरता को समाप्त करते हुए फसल विविधीकरण को अपनाया। उन्होंने कुल 30 एकड़ क्षेत्र में विभिन्न फसलों की बोनी की 10 एकड़ में चना – जीरो सीड ड्रिल तकनीक से 10 एकड़ में गेहूं, 10 एकड़ में महा तिवड़ा – जीरो सीड ड्रिल तकनीक से | फसल विविधीकरण से जोखिम में कमी, भूमि स्वास्थ्य में सुधार तथा आय के अवसरों में वृद्धि हुई।जीरो सीड ड्रिल तकनीक से कम लागत, अधिक लाभकश्यप ने जीरो सीड ड्रिल तकनीक को अपनाकर खेती की लागत को कम किया और उत्पादन को अधिक स्थिर बनाया। इस तकनीक से उन्हें निम्न लाभ प्राप्त हुए खेत की नमी का संरक्षण, जुताई पर होने वाला खर्च कम, समय और ईंधन की बचत, फसलों की बेहतर वृद्धि एवं उत्पादनबीज उत्पादन से अतिरिक्त आमदनी की संभावनाकश्यप ने सभी फसलों में बीज उत्पादन कार्यक्रम को अपनाया, जिससे उन्हें गुणवत्तापूर्ण बीज प्राप्त हुआ, बाजार में बीज के रूप में बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बनी, आगामी मौसम के लिए आत्मनिर्भरता सुनिश्चित हुईअन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोतछेदी लाल कश्यप की यह सफलता कहानी यह स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि पराली का सदुपयोग, फसल विविधीकरण, आधुनिक कृषि यंत्रीकरण, वैज्ञानिक एवं टिकाऊ पद्धतियाँ अपनाकर किसान आय में वृद्धि, लागत में कमी और पर्यावरण संरक्षण—तीनों लक्ष्यों को एक साथ प्राप्त कर सकते हैं। उनका यह नवाचारी प्रयास क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है और यह सिद्ध करता है कि वैज्ञानिक सोच और तकनीक के माध्यम से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है। Post navigationउप मुख्यमंत्री अरुण साव ने खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स के लिए मशाल गौरव यात्रा को दिखाई हरी झंडी सुगम धान खरीदी व्यवस्था से किसानों को मिल रहा भरोसा – बीजाभाट उपकेंद्र बसनी में ईश्वर यदु ने बेचा 264 क्विंटल धान